7 mukhi rudraksha tantraastro

7 MUKHI RUDRAKSHA सात मुखी रुद्राक्ष के चमत्कारी लाभ

सात मुखी रुद्राक्ष को माँ लक्ष्मी का स्वरुप माना गया है साथ ही शनिदेव की भी विशेष कृपा इस रुद्राक्ष को धारण करने वाले जातक पर रहती है I सात मुखी रुद्राक्ष को कामुकता के स्‍वामी कामदेव से संबंधित माना गया है। यह मनका सप्तमातृकाओं द्वारा और धन की देवी मां लक्ष्मी के आशीर्वाद से युक्त होता है, जो इसे और भी अधिक शक्तिशाली और लाभों से युक्त बनाता है और अचल सम्पत्ति बनी रहती है। यह रुद्राक्ष धन प्राप्ति के लिए विशेष उपयोगी है क्योंकि यह देवी लक्ष्मी का प्रतिनिधित्व करता है। यह 7 मुखी रुद्राक्ष पहनने वाले व्यक्ति को समृद्धि और खुशी देता है।

इस रुद्राक्ष को कई शक्तिशाली देवताओं और देवी द्वारा आशीर्वाद दिया जाता है, पहनने वाले को अच्छा नाम और प्रसिद्धि, प्रगति और धन मिलता है और देवी महालक्ष्मी प्राप्ति होती है। ज्योतिष के अनुसार, मारक ग्रह की दशा होने पर इस रुद्राक्ष को धारण किया जा सकता है यह रक्षा कवच की तरह कार्य करता है और अकाल मृत्यु के भय से भी मुक्त करता है। शनि की साढ़े साती या ढैय्या के समय सात मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। इस रुद्राक्ष को धारण करने पर शनिदेव खुश रहते हैं।

दो मुखी रुद्राक्ष को धारण करने के लाभ –

  • सात मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से धन-संबंधी सभी कष्ट दूर होते है I
  • इसे धारण करने से महान सम्पत्ति तथा आरोग्य प्राप्त होता है।
  • करियर और व्‍यापार में लाभ पाने के लिए सात मुखी रुद्राक्ष धारण किया जाता है।
  • धन प्राप्त होने के नये-नये द्वार खुलने लगते है I
  • सात मुखी रुद्राक्ष में 7 दिव्य सर्प निवास करते हैं जो इसे धारण करने वाले को अपार शक्ति से जोड़ता है।
  • मुश्किल परिस्थिति में भाग्‍य का साथ पाने हेतु इस रुद्राक्ष को पहन सकते हैं।
  • यदि इसे पवित्र भावना से धारण किया जाये तो आत्म ज्ञान की प्राप्ति होती है। 
  • जो व्यक्ति अपनी आर्थिक स्थिति से परेशान है उन्हें इस रुद्राक्ष को अवश्य धारण करना चाहिए I
  • अपने और अपने परिवार से आर्थिक संकट को हमेशा-हमेशा के लिए दूर करने के लिए सात मुखी रुद्राक्ष की स्थापना पूजा स्थल पर करनी चाहिए I
  • अच्छी आय होने के बाद भी खर्चे आय से अधिक होते हो तब सात मुखी रुद्राक्ष लाभ पहुंचाता है I
  • यह शनि के क्रूर प्रभाव को कम करता है जो खुशी और विकास को प्रतिबंधित करता है I
  • इस रूद्राक्ष को धारण करने से ग्रहों का नकारात्मक प्रभाव समाप्त हो जाता है।
  • घर से गरीबी दूर करने और आर्थिक रूप से संपन्‍नता पाने के लिए सात मुखी रुद्राक्ष बहुत लाभकारी होता है।
  • यह जीवन में नए अवसरों के द्वार को खोलने में मदद करता है I
  • सात मुखी रुद्राक्ष धारण करने से व्यक्ति के आय स्त्रोत में वृद्धि होती है I माँ लक्ष्मी की कृपा ऐसे जातक पर सदैव बनी रहती है I
  • मानसिक परेशानी, मधुमेह, गठिया दर्द , दिल की समस्याओं, हड्डी व मांसपेशियों में पीड़ा, यौन संबंधी समस्याओं, पाचन संबंधी समस्याओं, स्नायु तंत्र से सम्बंधित रोगों, नपुंसकता, पैर की बीमारियों, श्वसन विकार और पुरानी बीमारियों जैसे शनि से प्रेरित रोगों के इलाज व अस्थमा जैसे रोगों में सात मुखी रुद्राक्ष धारण करने से लाभ मिलता है I
  • यह नौकरी की संभावनाओं को बढ़ाता है और नौकरी में पदोन्नति को सक्षम बनाता है।
  • सात मुखी रुद्राक्ष धारण करने से व्यक्ति व्यवसाय और सेवा में अधिक उन्नति प्राप्त कर सकता है।
  • यह रोजगार के अवसरों और संभावनाओं को खोलने में मदद करता है।
  • इसे धारण करने से लम्बी आयु प्राप्त होती है I

7 मुखी रुद्राक्ष धारण करने की विधि –

  • इसे पेडेंट या ब्रेसलेट के रूप में पहना जा सकता है।
  • 7 मुखी रुद्राक्ष को सोने एवं चाँदी के साथ पहनें अथवा इसे लाल धागे के साथ पहनें।
  • आप इसे उस स्थान पर भी रख सकते हैं जहां आप पूजा करते हैं।
  • रुद्राक्ष धारण करने से पूर्व रुद्राक्ष को गंगा जल और कच्चा दूध से शुद्ध करें।
  • इसे सोमवार, शिवरात्रि या श्रावण मास को सुबह स्नानादि और पूजा-अर्चना के बाद धारण करना चाहिए।
  • इसके बाद रुद्राक्ष मंत्र ‘ॐ हूं नमः’ का 108 बार जाप करें और धारण करे। 

नोट – हमारे द्वारा उपलब्ध सभी प्रकार के रुद्राक्ष एवं तंत्र, ज्योतिषी सामग्री को हमारे अनुभवी विद्वान पंडित जी द्वारा अभिमंत्रित एवम् सिद्ध कर के आपके पास भेजा जाता है, जिससे आपको अति शीघ्र इसका पूर्ण लाभ मिल सके।

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6 MUKHI RUDRAKSHA छ: मुखी रुद्राक्ष के चमत्कारी लाभ

छ: मुखी रुद्राक्ष को भगवान शिव के पुत्र भगवान कार्तिकेय का स्वरुप माना गया है।  6 मुखी रुद्राक्ष को तीन देवियों सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती का स्वरूप माना गया है। यह पहनने वाले को असीम गुणों के साथ आशीर्वाद प्रदान करता है। ज्योतिष के प्रभाव अनुसार इस रुद्राक्ष को धारण करने से शुक्र मजबूत बनता है I शुक्र जनित दोषों को दूर करने में यह रुद्राक्ष बहुत प्रभावी सिद्ध होता है I

पुराण अनुसार 6 मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से ब्रह्म हत्या जैसे भयंकर पाप से भी मुक्ति मिलती है I व्यापार लाभ, ऋद्धि-सिद्धि, लक्ष्मी, और कार्य पूर्ण आश्चर्यजनक सफलता प्राप्त करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। यह पहनने वाले के शरीर में क्रोध, ईर्ष्या, उत्तेजना को नियंत्रण में रखता है। यह रुद्राक्ष शरीर के पौष्टिक तत्वों को बढ़ाता है जिसके परिणामस्वरूप नई ब्रह्मांडीय शक्तियों (देवी शक्ति) का निर्माण होता है।

यह रुद्राक्ष पहनने वाले के लिए धन का अवसर खोलता है और हमेशा उसके साथ रहता है। यह हर सुख-सुविधा का प्रदाता है और बिजनेस को बढ़ाता है। इसे धारण करने वाले व्यक्ति को कभी भी धन की कमी नहीं रहती, कही न कही से उसे आकस्मिक धन प्राप्ति होती ही रहती है I

6 मुखी रुद्राक्ष को धारण करने के लाभ –

  • विद्यार्थी के लिए छहः मुखी रुद्राक्ष को धारण करना श्रेष्ठ माना गया है , इससे उनकी बुद्धि का विकास होता है व हर परीक्षा में सफलता प्राप्त होती है I
  • यह पहनने वाले के आकर्षण को बढ़ाता है I
  • देवी लक्ष्मी छह मुखी रुद्राक्ष में निवास करती हैं, इसलिए धन और समृद्धि प्रदान करती हैं।
  • राशिनुसार तुला और वृषभ राशि के जातकों के लिए यह रुद्राक्ष शुभ माना जाता है।
  • बच्चे के गले में छः मुखी रुद्राक्ष जरूर धारण करवाना चाहिए, इसके धारण से बच्चा वीर तथा रोग मुक्त होता है।
  • यह महिलाओं को हिस्टीरिया और अन्य मानसिक बीमारियों जैसे रोगों में मदद करता है।
  • यह मिर्गी और सभी महिलाओं से संबंधित समस्याओं के इलाज में फायदेमंद है।
  • यह शुक्र ग्रह के लिए सबसे अच्छा उपाय में से एक है।
  • यह कानूनी समस्याओं को दूर करने में भी मदद करता है I
  • अगर आपके जीवन में प्रेम की कमी है तो आपको छह मुखी रुद्राक्ष जरूर धारण करना चाहिए।
  • तीव्र बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति के लिए 6 मुखी रुद्राक्ष को धारण किया जाना चाहिए I
  • छहः मुखी रुद्राक्ष पहनने से जीवन से हर प्रकार की दरिद्रता दूर होती है I
  • यह व्यक्ति के वक्तव्य कौशल को बढ़ाता है और कलात्मक गुणों को बढ़ाता है I
  • यह यौन समस्याओं के इलाज में मदद करता है I
  • 6 मुखी रुद्राक्ष मिर्गी, स्त्री रोग संबंधी समस्याओं, गले, गर्दन, किडनी, यौन अंगों, थायराइड, प्रदर, कामुकता, ड्रॉप्सी, मूत्र. आंखों के रोगों, गर्भनिरोधक समस्या, अपच, हिस्टीरिया, मूर्च्छा संबंधित समस्या में बहुत प्रभावी है।

6 मुखी रुद्राक्ष धारण करने की विधि –

  • इसे पेडेंट या ब्रेसलेट के रूप में पहना जा सकता है।
  • 6 मुखी रुद्राक्ष को सोने एवं चाँदी के साथ पहनें अथवा इसे लाल धागे के साथ पहनें।
  • आप इसे उस स्थान पर भी रख सकते हैं जहां आप पूजा करते हैं।
  • रुद्राक्ष धारण करने से पूर्व रुद्राक्ष को गंगा जल और कच्चा दूध से शुद्ध करें।
  • इसे मंगलवार को सुबह स्नानादि और पूजा-अर्चना के बाद धारण करना चाहिए।
  • इसके बाद रुद्राक्ष मंत्र “ओम ह्रीं हं नम:” का 108 बार जाप करें और धारण करे। 

नोट – हमारे द्वारा उपलब्ध सभी प्रकार के रुद्राक्ष एवं तंत्र, ज्योतिषी सामग्री को हमारे अनुभवी विद्वान पंडित जी द्वारा अभिमंत्रित एवम् सिद्ध कर के आपके पास भेजा जाता है, जिससे आपको अति शीघ्र इसका पूर्ण लाभ मिल सके।

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5 MUKHI RUDRAKSHA पांच मुखी रुद्राक्ष के चमत्कारी लाभ

पांच मुखी रुद्राक्ष साक्षात् भगवान शिव के काल अग्नि रुद्र रुप से शासित है I इसके अधिपति गृह ब्रहस्पति देव है I इसलिए ज्योतिष के अनुसार ब्रहस्पति कमजोर होने पर पांच मुखी रुद्राक्ष को धारण किया जाता है।  इसे “सर्व कल्याणकारी” के रूप में जाना जाता है। यह व्यक्ति को जीवन के सभी प्रकार के अवांछित बंधनों से मुक्त करने के लिए और समय के साथ पहनने वाले की इच्छांओं पूरा करता है। यह पहनने वाले के आसपास की सभी नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर देता क्योंकि यह भगवान शिव की शक्ति से ओत-प्रोत है।

इस रुद्राक्ष पर पांच देवी-देवताओं की कृपा बरसती है और इस वजह से ये रुद्राक्ष बहुत खास माना जाता है। इस रुद्राक्ष को धारण करने से मनुष्‍य के बुरे कर्मों का अंत होता है। पांच मुखी रुद्राक्ष धारण करने से भगवान श्री शिव, श्री विष्णु , भगवान गणेश , सूर्य देव और माँ भगवती की विशेष कृपा प्राप्त होती है I इसके उपयोग से जीवन के सभी क्षेत्रों में भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है और मोक्ष को इंगित करता है, सभी इच्छाओं को पूरा करता है और पहनने वाले को बीमारियों से दूर रखता है।

यह जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करने और ज्ञान, धन, शक्ति, प्रसिद्धि प्राप्त करने और लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करता है। इसके धारण करने से मानसिक शान्ति प्राप्त होती है, मन प्रफुल्लता लिए रहता है, एकाग्रता बढती है, शत्रुनाश का नाश होता है, जिसके गले में यह रूद्राक्ष होता है, उसे सांप-बिच्छु आदि ज़हरीले जानवरों का डर नहीं रहता। यह रुद्राक्ष वर्तमान जीवन में व्यक्ति द्वारा किए गए विभिन्न पापों को समाप्त करता है। इसे “देव गुरु रुद्राक्ष” की उपाधि दी गई है क्योंकि इस तथ्य के कारण कि इसका शासक ग्रह बृहस्पति है जो देवताओं का गुरु है।

5 मुखी रुद्राक्ष को धारण करने के लाभ –

  • जो व्यक्ति पंचमुखी रुद्राक्ष धारण करते है वह भगवान शिव के प्रिय बन जाते है। उसके ऊपर किसी भी प्रकार का तंत्र प्रयोग नही हो सकता अगर हो तो शीघ्र ही समाप्त हो जाता है।
  • मानसिक शांति प्राप्‍त करने के लिए इस रुद्राक्ष को धारण कर सकते हैं।
  • यह व्यक्ति को असमय मृत्यु से बचाता है, यह पहनने वाले को निडर बनाता है I
  • पांच मुखी रुद्राक्ष में पंचदेवों की कृपा का वास है इसलिए पंच तत्व जनित दोषों को दूर करने में पांच मुखी रुद्राक्ष का विशेष महत्व है I
  • मेष , धनु, और मीन राशि के जातकों को पांच मुखी रुद्राक्ष धारण करने से लाभ प्राप्त होता है I
  • यह पहनने वाले की आत्मा को जागृत करता है और आध्यात्मिकता को बढ़ावा देता है I
  • धन और समृद्धि पाने के लिए पांच मुखी रुद्राक्ष को धारण करने की सलाह दी जाती है।
  • यह व्यक्ति को बुद्धिमान बनाता है और व्यक्तित्व से नीरसता को दूर करता है I
  • नकारात्मक उर्जा व मन में नकारात्मक भाव से बचने में पांच मुखी रुद्राक्ष एक कवच के रूप में कार्य करता है I
  • यह विद्यार्थियों के लिए भी लाभदायक है क्योंकि यह पढ़ाई में ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है I
  • वैवाहिक जीवन में सुख-शांति लाने में भी ये रुद्राक्ष फायदेमंद है।
  • पांच मुखी रुद्राक्ष धारण करने से हर प्रकार के मानसिक विकार , मधुमेह व रक्तचाप से मुक्ति मिलती है I
  • परिवार में सुख-शांति के लिए भी पांच मुखी रुद्राक्ष धारण किया जाना चाहिए I
  • इसको धारण करने से एकाग्रता और याददाश्त बढ़ती है I

5 मुखी रुद्राक्ष धारण करने की विधि –

  • इसे पेडेंट या ब्रेसलेट के रूप में पहना जा सकता है।
  • 5 मुखी रुद्राक्ष को सोने एवं चाँदी के साथ पहनें अथवा इसे लाल धागे के साथ पहनें।
  • आप इसे उस स्थान पर भी रख सकते हैं जहां आप पूजा करते हैं।
  • रुद्राक्ष धारण करने से पूर्व रुद्राक्ष को गंगा जल और कच्चा दूध से शुद्ध करें।
  • इसे गुरुवार को सुबह स्नानादि और पूजा-अर्चना के बाद धारण करना चाहिए।
  • इसके बाद रुद्राक्ष मंत्र ‘ॐ ह्रीं नम:’ का 108 बार जाप करें और धारण करे। 

नोट – हमारे द्वारा उपलब्ध सभी प्रकार के रुद्राक्ष एवं तंत्र, ज्योतिषी सामग्री को हमारे अनुभवी विद्वान पंडित जी द्वारा अभिमंत्रित एवम् सिद्ध कर के आपके पास भेजा जाता है, जिससे आपको अति शीघ्र इसका पूर्ण लाभ मिल सके।

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4 FOUR MUKHI RUDRAKSHA चार मुखी रुद्राक्ष के चमत्कारी लाभ

यह रुद्राक्ष बुद्धि को तीव्र करता है शरीर के रोगों को भी दूर करने में भी सहायक सिद्ध होता है I इस रुद्राक्ष को धारण करने से वाणी में मिठास और दूसरों को अपना बनाने की कला विकसित होती है I वेदों और धार्मिक ग्रंथो के अध्यन में भी सफलता प्राप्त होती है | शिवमहापुराण  के अनुसार इस रुद्राक्ष को लम्बे समय तक धारण करने से और भगवान शिव के बीज मंत्रो का पाठ करने से जीव हत्या के पाप से भी मुक्ति मिल सकती है I इस रुद्राक्ष का अधिपति ग्रह बुध है, जिस कारण यह आपको शिक्षा के क्षेत्र में सफलता दिलाने में, बुध के नकारात्मक प्रभावों को कम करने और विद्या की देवी मां सरस्वती की कृपा पाने के लिए उत्तम है।

इसे धारण करने से शिक्षा, ज्ञान में सफलता प्राप्त होती है। ऐसे व्यक्ति या बच्चे जिसकी मन्द बुद्धि हो, वाक्शक्ति कमज़ोर हो, स्मरण शक्ति क्षीण हो या जिनका पढाई में मन नही लगता हो, उसके लिए यह रुद्राक्ष कल्पतरु के समान है। चार मुखी रुद्राक्ष को स्‍वयं ब्रह्मा जी का रूप माना गया है। सर्व वेदों के ज्ञाता एवं संसार के रचयिता ब्रह्मा जी की शक्‍तियां इस रुद्राक्ष में समाहित हैं। इस रुद्राक्ष के प्रभाव से शिक्षा के क्षेत्र में आ रही रुकावटें दूर होती हैं।

चार मुखी रुद्राक्ष भगवान ब्रह्मा को चढ़ाया जाता है और चारों वेदों को समर्पित करता है। यह धरम, अर्थ, काम और मोक्ष देता है। इस चिंता का उपयोग मानसिक चिंताओं और बीमारियों को दूर करता है; व्यक्ति आध्यात्मिक हो जाता है और धन, अच्छे स्वास्थ्य, बुद्धि और भाषण की शक्ति से धन्य हो जाता है। यह चिंताओं को दूर करता है और आध्यात्मिकता को बढ़ाता है। जिन बच्चों का मन पढ़ने में नहीं लगता है या फिर बोलने में अटकता है उसे यह रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। इसको धारण करने से व्यभिचारी भी ब्रह्मचारी और नास्तिक भी आस्तिक हो जाता है। यह इंद्रियों को जगाने और जीवन के उद्देश्य के बारे में अधिक जागरूक बनने में मदद करता है।

4 मुखी रुद्राक्ष को धारण करने के लाभ –

  • इसके धारण करने से मनुष्य ब्रहम हत्या से मुक्त हो जाता है।
  • अगर आपका बच्‍चा पढ़ाई में कमजोर है या आपको स्‍वयं शिक्षा के क्षेत्र में असफलता मिल रही है तो आपको 4 मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।
  • यह बुद्धि के साथ-साथ मेमोरी, मुखर प्रदर्शन का विस्तार करता है I  इसे धारण करने से शिक्षा, ज्ञान में सफलता प्राप्त होती है।
  • यह सांस से संबंधित समस्याओं के इलाज के लिए मदद करता है I
  • इस रुद्राक्ष के शुभ प्रभाव से ज्ञान और संतान से संबंधित सभी तरह की समस्‍याएं दूर होती हैं।
  • कुंडली में ग्रह बुध को शक्ति देता है।
  • इसके धारण करने से स्वास्थ्य ठीक रहता है तथा उत्तम आरोग्य की प्राप्ति होती है।
  • यह शिक्षकों, लेखकों, छात्रों, व्यापारियों, विद्वानों, पत्रकारों और शोधकर्ताओं के लिए अत्यधिक फायदेमंद है।
  • यह गले संबंधी बीमारियों को ठीक करने में मदद करता है I
  • यह पहनने वाले को आध्यात्मिक विश्वास और अंतर्दृष्टि विकसित करने में मदद करता है I
  • इस रुद्राक्ष को पहनने वाले छात्र स्मरण शक्ति और एकाग्रता में वृद्धि के कारण अपनी पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करने में सक्षम होते हैं।
  • मिथुन या कन्या लग्न में जन्म लेने वाले जातकों के लिए यह विशेष रूप से लाभकारी है।

4 मुखी रुद्राक्ष धारण करने की विधि –

  • इसे पेडेंट या ब्रेसलेट के रूप में पहना जा सकता है।
  • 4 मुखी रुद्राक्ष को सोने एवं चाँदी के साथ पहनें अथवा इसे लाल धागे के साथ पहनें।
  • आप इसे उस स्थान पर भी रख सकते हैं जहां आप पूजा करते हैं।
  • रुद्राक्ष धारण करने से पूर्व रुद्राक्ष को गंगा जल और कच्चा दूध से शुद्ध करें।
  • इसे गुरुवार को सुबह स्नानादि और पूजा-अर्चना के बाद धारण करना चाहिए।
  • इसके बाद रुद्राक्ष मंत्र ‘ॐ ह्रीं नम:’ का 108 बार जाप करें और धारण करे। 

नोट – हमारे द्वारा उपलब्ध सभी प्रकार के रुद्राक्ष एवं तंत्र, ज्योतिषी सामग्री को हमारे अनुभवी विद्वान पंडित जी द्वारा अभिमंत्रित एवम् सिद्ध कर के आपके पास भेजा जाता है, जिससे आपको अति शीघ्र इसका पूर्ण लाभ मिल सके।

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3 THREE FACE MUKHI RUDRAKSHA 3 मुखी रुद्राक्ष के चमत्कारी लाभ

इस रुद्राक्ष को अग्नि देव का रूप कहा जाता है। अग्नि देव कठोर वैदिक देवता हैं, जो उग्र और शक्तिशाली हैं। इस रुद्राक्ष के अधिपति ग्रह मंगल है। यह मंगल और सूर्य से संबंधित दोषों को दूर करने के लिए धारण किया जाना चाहिए। 3 मुखी रुद्राक्ष पहनने वाले के आस-पास की नकारात्मक ऊर्जा को जला देता है और व्यक्ति के बुरे कर्म को नष्ट कर देता है, जिसेस व्यक्ति अपराध मुक्त और तनाव मुक्त हो जाता है। शास्त्रों के अनुसार इसको धारण करने से नारी हत्या के पाप से भी मुक्ति मिल सकती है।

जिस तरह अग्नि के संपर्क में आने पर सोना भी शुद्ध हो जाता है ठीक उसी प्रकार तीन मुखी रुद्राक्ष पहनने से व्‍यक्‍ति का मन और शरीर भी शुद्ध हो जाता है। इससे एकाग्रता और ध्‍यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ती है। इसको पहनने वाले का स्वास्थ्य, धन और ज्ञान का में बढ़ोत्तरी होती है। धारक को किसी भी प्रकार की बिमारी नहीं होती है और शत्रुओं का नाश होता है। यह उन लोगों में आत्म प्रेम को बढ़ावा देने में मदद करता है जिनके पास आत्मघृणा और मानसिक तनाव है।

तीन मुखी रुद्राक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों आदि शक्तियों का वास है I इसे धारण करने वाला जातक त्रिदेवों से आशीर्वाद पाता है I तीन मुखी रुद्राक्ष में अग्नि तत्व की प्रधानता है I अग्नि तत्व जो कि पंच तत्वों में भी प्रधान तत्व माना गया है I अग्नि तत्व की प्रमुखता के कारण तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करने से जातक के विचारों में शुद्धता व स्थिरता आती है I 3 मुखी रुद्राक्ष पहनने से उन पापों से छुटकारा मिलता है जो उसने अपने पिछले जन्म में किए थे और शुद्ध रूप से सच्चे जीवन में लौटते हैं। यह उन लोगों के लिए सबसे अच्छा है जो हीन भावना के शिकार हो गए हैं या भयभीत हैं और आत्म घृणा या मानसिक तनाव से पीड़ित हैं।

3 मुखी रुद्राक्ष के चमत्कारी लाभ –

  • मंगल और सूर्य से सम्बंधित दोषों को दूर करने के लिए 3 मुखी रुद्राक्ष धारण किया जाना चाहिए I
  • 3 मुखी रुद्राक्ष तीन देवों (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) का प्रतीक है।
  • जो व्यक्ति इस रुद्राक्ष को सिद्धि के बाद पहनता है, उसे हमेशा तीन शक्तियों का आशीर्वाद और तीन देवों का साथ मिलेगा।
  • जिन लोगों का जन्म लग्न व राशी मेष, वृश्चिक या धनु हो, उनके लिए इस रुद्राक्ष का धारण करना अति शुभ माना गया है I
  • जीवन में सफलता प्राप्त करने हेतु व मान-सम्मान प्राप्त करने हेतु तीन मुखी रुद्राक्ष को धारण किया जाना चाहिए I
  • इस रुद्राक्ष को पहनने वाला अब एक साधारण आदमी नहीं रह जाता है क्योंकि पहनने वाले के साथ तीन शक्ति हमेशा रहती है जो उसे अपने सभी कार्यों में सफलता प्राप्त करने में मदद करता है।
  • 3 मुखी रुद्राक्ष पहनने से मानसिक और शारीरिक शांति मिलती है I
  • यह तनाव से मुक्ति और सफलता पाने में मदद करता है I
  • ये पाचन तंत्र में सुधार करता है और सेहत एवं शरीर की मजबूती को बढ़ाता है।
  • 3 मुखी रुद्राक्ष में अग्नि तत्व होने से यह पेट की बिमारियों में लाभ प्रदान करता है I
  • पेट की अग्नि मंद होने पर भोजन समय पर न पचने पर तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करने से अवश्य ही लाभ मिलता है I
  • जिन लोगों को भूख कम लगती है या आप बहुत ज्‍यादा बीमार रहते हैं तो आपको भी 3 मुखी रुद्राक्ष से लाभ होगा।
  • चेहरे पर तेज और रौनक लाने के लिए भी इस रुद्राक्ष को धारण कर सकते हैं।
  • तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करने स्त्री हत्या जैसे पापों से भी मुक्ति मिलती है I
  • यह जीवन पर मंगल ग्रह के दुष्प्रभाव का इलाज करता है I
  • आत्मविश्वास बढाने के लिए इस रुद्राक्ष को पहनना चाहिए I
  • इससे जातक का आत्मविश्वास ही नहीं अपितु यह उसे उर्जावान भी बनाये रखता है I
  • यह रक्तचाप, मधुमेह और रक्त संक्रमण को नियंत्रित करने में मदद करता है I
  • यह महिलाओं के मासिक धर्म की समस्याओं को ठीक करने में मदद करता है I
  • यह आलस त्यागने और अधिक सक्रिय और सतर्क बनने में मदद करता है I

3 मुखी रुद्राक्ष धारण करने की विधि –

  • 3 मुखी रुद्राक्ष को सोने एवं चाँदी के साथ पहनें अथवा इसे लाल धागे के साथ पहनें।
  • सोमवार, पूर्णिमा अथवा शिवरात्रि के दिन इस रुद्राक्ष को धारण करें।
  • रुद्राक्ष धारण करने से पूर्व रुद्राक्ष को गंगा जल और कच्चा दूध से शुद्ध करें।
  • ऊं क्‍लीं नम: मंत्र का 108 बार जाप करें और धारण करे I
  • इससे आपको 3 मुखी रुद्राक्ष को दोगुना लाभ मिलता है।

नोट – हमारे द्वारा उपलब्ध सभी प्रकार के रुद्राक्ष एवं तंत्र, ज्योतिषी सामग्री को हमारे अनुभवी विद्वान पंडित जी द्वारा अभिमंत्रित एवम् सिद्ध कर के आपके पास भेजा जाता है, जिससे आपको अति शीघ्र इसका पूर्ण लाभ मिल सके।

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2 MUKHI RUDRAKSHA 2 मुखी रुद्राक्ष के चमत्कारी लाभ

दो मुखी रुद्राक्ष को भगवान शिव और मां पार्वती का रूप कहा जाता है। इसके अलावा इसका स्वामी चंद्रमा ग्रह है। इस रुद्राक्षण को धारण करने वाले व्‍यक्‍ति की सभी समस्‍याएं खुद ईश्‍वर दूर करते हैं। वैवाहिक सुख की प्राप्‍ति के लिए भी इस रुद्राक्ष को धारण किया जाता है। दो मुखी रुद्राक्ष सीधे सीधे भगवान शिव और माँ पारवती का स्वरुप है | इसे अर्धनारीश्वर का स्वरुप भी कहा गया है | इस रुद्राक्ष को धारण करने से शिव और शक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है | वैसे तो इस रुद्राक्ष की उत्पति नेपाल, इंडोनेशिया व् भारत में कई स्थानों पर होती है लेकिन नेपाल का दो मुखी रुद्राक्ष सबसे श्रेष्ठ माना गया है |

दो मुखी रुद्राक्ष को धारण करने के लाभ –

  • इसके धारक का क्षेत्र में सम्मान बढ़ता है, रूप, सौंदर्य अवं वाक्शक्ति की वृद्धि करता है |
  • ज्योतिष के अनुसार कर्क राशी के जातकों के लिए दो मुखी रुद्राक्ष को धारण करना शुभ माना गया है |
  • पति पत्नी के आपसी मतभेदों को कम करके ग्रहस्थ सुख की बढ़ोतरी करता है |
  • शारीरिक बिमारियों में यह मोटापे और ह्रदय रोग को दूर करने में लाभकारी है |
  • इसको धारण करने से दांपत्य जीवन सुखी रहता है |
  • यह पहनने वाले के अन्तर्मन को ठीक करता है और सदैव पित्त को शांत रखता है |
  • इसके धारण से भूत प्रेत की बाधा भी दूर होती है और सभी प्रकार की इच्छाएँ धीरे धीरे पूर्ण होने की ओर बढ़ने लगती हैं |
  • दो मुखी रुद्राक्ष का धारक महाशिवपुराण के अनुसार ब्रह्म हत्या एवं गाए हत्या के पाप से भी मुक्त हो सकता है |
  • दो मुखी रुद्राक्ष भगवान चन्द्र देव के अधिकार क्षेत्र में आता है |
  • इसके धारण करने से मन में चन्द्रमा की चांदनी जैसी शीतलता प्रदान होती है मनुष्य ने जीवन में कई प्रकार के अगर पाप भी किए हों और अंतिम अवस्था में अगर दो मुखी रुद्राक्ष धारण किया हो तो जीवन में पापी होने के बावजूद मरणोपरांत स्वर्ग की प्राप्ति होती है इसलिए हर जन को अर्धनारीश्वर स्वरुप भगवान शिव और शक्ति के आशीर्वाद के रूप में नेपाली दो मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए |
  • यदि आप क़र्ज़ से पीड़ित है और कर्ज बढ़ता ही जा रहा है तो ऐसे में दो मुखी रुद्राक्ष को धारण करना आपके लिए जीवन में नई खुशियाँ ला सकता है | दो मुखी रुद्राक्ष धारण करने से क़र्ज़ से मुक्ति पाने के द्वार खुलने लगते है |
  • यह ऊपरी बाधाओं को भी दूर करने में सक्षम माना गया है | भूत-प्रेत जैसी नकारात्मक शक्तियाँ दो मुखी रुद्राक्ष के धारण करने से दूर होती है |
  • जिन लोगों को अनिद्रा की शिकायत है उन्हे दो मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए |
  • राहु के दुष्प्रभाव को रोकने के लिए भी इस रुद्राक्ष को धारण करना चाहिए |
  • यह पहनने वाले को समाज में मान-सम्मान दिलाता है |
  • यह रुद्राक्षधारी के सौंदर्य में वृद्धि और उसकी वाकशक्ति को बढ़ाता है |
  • यह दो मुखी रुद्राक्ष स्मृति हानि, हृदय की समस्याओं, श्वसन, यकृत और श्वास समस्या जैसी बीमारियों को ठीक करने में मदद करता है |
  • 2 मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। पारिवारिक सुख के लिए भी इस रुद्राक्ष को पहन सकते हैं |
  • भूत-प्रेत से रक्षा एवं ब्रह्म हत्‍या और गऊ हत्‍या के पाप से मुक्‍ति पाने के लिए इस रुद्राक्ष को धारण कर सकते हैं |
  • इससे पेट, गैस्ट्रिक या किडनी की समस्या वाले लोगों को भी फायदा होता है।
  • प्राचीन हिंदू वैदिक ग्रंथों के अनुसार, एक 2 मुखी रुद्राक्ष नपुंसकता, एकाग्रता की कमी, गुर्दे की विफलता, तनाव, चिंता, अवसाद, नकारात्मक सोच, आंखों की समस्याओं को दूर करता है।
  • मानसिक अराजकता, उन्माद, आंतों के विकार आदि जैसे विभिन्न रोगों के उपचार के लिए उल्लेखनीय रूप से काम करता है।
  • यह किडनी और आंत से संबंधित बीमारियों को ठीक करता है।
  • यह पहनने वाले की प्रजनन क्षमता और यौन स्वास्थ्य में सुधार करता है।

2 मुखी रुद्राक्ष धारण करने की विधि –

  • इसे पेडेंट या ब्रेसलेट के रूप में पहना जा सकता है।
  • 2 मुखी रुद्राक्ष को सोने एवं चाँदी के साथ पहनें अथवा इसे लाल धागे के साथ पहनें।
  • आप इसे उस स्थान पर भी रख सकते हैं जहां आप पूजा करते हैं।
  • रुद्राक्ष धारण करने से पूर्व रुद्राक्ष को गंगा जल और कच्चा दूध से शुद्ध करें।
  • इसे रविवार को सुबह स्नानादि और पूजा-अर्चना के बाद धारण करना चाहिए।
  • इसके बाद रुद्राक्ष मंत्र ‘ॐ ह्रीं नम:’ का 108 बार जाप करें और धारण करे। 

नोट – हमारे द्वारा उपलब्ध सभी प्रकार के रुद्राक्ष एवं तंत्र, ज्योतिषी सामग्री को हमारे अनुभवी विद्वान पंडित जी द्वारा अभिमंत्रित एवम् सिद्ध कर के आपके पास भेजा जाता है, जिससे आपको अति शीघ्र इसका पूर्ण लाभ मिल सके।

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EK MUKHI RUDRAKSHA एक मुखी रुद्राक्ष के चमत्कारी लाभ

एक मुखी रुद्राक्ष स्वयं भगवान शिव के समान है। रुद्राक्ष को “दिव्य मनका” के नाम से भी जाना जाता है। एक गोल एक मुखी रुद्राक्ष अत्यंत दुर्लभ है और इसलिए “एक मुखी रुद्राक्ष” को आमतौर पर “आधा चंद्रमा आकार का एक मुखी रुद्राक्ष” और “चंद्र एक मुखी रुद्राक्ष” के रूप में भी जाना जाता है। इस एकमुखी रुद्राक्ष के प्रभाव में मनुष्‍य अपनी इंद्रियों को वश में कर ब्रह्म ज्ञान की प्राप्‍ति की ओर अग्रसर होता है।

जिस घर में एक मुखी रुद्राक्ष की पूजा की जाती है, उस स्थान पर देवी मललक्ष्मी का आशीर्वाद होता है। यह रुद्राक्ष सभी इच्छाओं को पूरा करता है और समृद्धि, भाग्य, भाग्य, सांसारिक सुखों के साथ-साथ अपने पहनने वाले को उद्धार भी लाता है। भगवान शिव स्वयं इस रुद्राक्ष को पहनने वाले से प्रसन्न होते हैं और उनके मार्ग की कोई भी बाधा दूर हो जाती है, जिससे वे एक समृद्ध और शक्तिशाली जीवन जी सकते हैं।

एक मुखी रुद्राक्ष के चमत्कारी लाभ –

  • एक मुखी रुद्राक्ष धारण करने वाले व्यक्ति की आध्यात्मिक इच्छाएँ पूर्ण होती हैं, जीवन में समृद्धि आती है और मन को शांति मिलती है।
  • जो व्यक्ति इस रुद्राक्ष को धारण करता है उसके आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता में वृद्धि तथा व्यक्तित्व का विकास होता है।
  • यह रुद्राक्ष करियर तथा व्यवसाय में सफलता दिलाने में सहायक होता है।
  • इस एकमुखी रुद्राक्ष के प्रभाव में मनुष्‍य अपनी इंद्रियों को वश में कर ब्रह्म ज्ञान की प्राप्‍ति की ओर अग्रसर होता है।
  • इसे धारण करने से मनुष्‍य की उसके शत्रुओं से रक्षा होती है। धन प्राप्‍ति में भी एकमुखी रुद्राक्ष सहायक होता है।
  • इस रुद्राक्ष को धारण करने वाले व्यक्ति को आर्थिक लाभ और समाज में मान-सम्मान प्राप्त होता है।
  • यदि कोई व्यक्ति रक्त, हृदय, आँख और सिर आदि से संबंधित विकार से पीड़ित है तो उसके लिए यह रुद्राक्ष चमत्कारिक उपाय है।
  • यह रुद्राक्ष बुरी आदतों (नशीले पदार्थ का सेवन आदि) को छुड़वाने में सहायक है।
  • इस रुद्राक्ष की मदद से धारणकर्ता अपनी इंद्रियों को वश में कर ब्रह्म ज्ञान की प्राप्‍ति की ओर अग्रसर होता है।
  • हाई ब्‍लड प्रेशर के मरीज़ों के लिए यह रुद्राक्ष बहुत फायदेमंद रहता है।
  • एक मुखी रुद्राक्ष मनका दुनिया में सबसे दुर्लभ मोतियों में से एक है।
  • एक मुखी रुद्राक्ष सभी प्रकार के मनोवैज्ञानिक विकार, मानसिक पीड़ा और अवसाद को ठीक करता है।
  • एक मुखी मनका मानसिक और विक्षिप्त विकार को दूर करने में लाभदायक है।
  • यदि कुंडली में सूर्य कमज़ोर हो अथवा अस्त तो एक मुखी रुद्राक्ष का धारण करना चाहिए।
  • यदि किसी क्रूर ग्रह की दशा या अंतर्दशा चल रही है तो भी एक मुखी रुद्राक्ष को पहना जा सकता है। इसको धारण करने से सूर्य के नकारात्मक प्रभाव दूर हो जाते हैं।
  • एक मुखी रुद्राक्ष शक्ति, ऊर्जा, सत्य और मोक्ष का प्रबल स्रोत होता है। इस रुद्राक्ष का स्वामी सूर्य ग्रह होते है और भगवान शिव इसके स्वामी देव हैं।
  • इस रुद्राक्ष को धारण करने वाला व्यक्ति स्वयं को भगवान शिव और पारलौकिक जीवन से जुड़ा हुआ पाता है।

एक मुखी रुद्राक्ष धारण करने की विधि –

  • एक मुखी रुद्राक्ष को सोने एवं चाँदी के साथ पहनें अथवा इसे लाल धागे के साथ पहनें।
  • सोमवार, पूर्णिमा अथवा शिवरात्रि के दिन इस रुद्राक्ष को धारण करें।
  • रुद्राक्ष धारण करने से पूर्व रुद्राक्ष को गंगा जल और कच्चा दूध से शुद्ध करें।
  • “ॐ ह्रीं नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें और धारण करे

नोट – हमारे द्वारा उपलब्ध सभी प्रकार के रुद्राक्ष एवं तंत्र, ज्योतिषी सामग्री को हमारे अनुभवी विद्वान पंडित जी द्वारा अभिमंत्रित एवम् सिद्ध कर के आपके पास भेजा जाता है, जिससे आपको अति शीघ्र इसका पूर्ण लाभ मिल सके।

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Dakshinvarti Shankh दक्षिणावर्ती शंख Benefits of Dakshinvarti Shankh

ज्योतिष के अनुसार ये शुक्र देव और लक्ष्मी जी की कारक वस्तु माना जाता है। इसको पास रखने मात्र से ही हर इच्छा पूरी होने लगती है। इस चिराग से हर तरह का वास्तु दोष दूर हो जाता है। धन और भौतिक सुख के कारक शुक्र और लक्ष्मी की प्रिय वस्तु माने जाने वाले इस चिराग को दक्षिणावर्ती शंख कहा जाता है।

साधारणत: मंदिर में रखे जाने वाले शंख उल्टे हाथ के तरफ खुलते हैं और बाज़ार में आसानी से ये कहीं भी मिल जाते हैं लेकिन दक्षिणावर्ती शंख एक दुर्लभ वस्तु है। ये आसानी से नहीं मिल पाता है क्योंकि दक्षिणावर्ती शंख को लक्ष्मी का स्वरुप माना जाता है। इसलिए ही ज्योतिष में बताया गया है कि दक्षिणावृत्त शंख घर में होने पर लक्ष्मी का घर में वास रहता है।

तंत्र शास्त्र ने भी इस अनोखे चिराग के लिए कहा है कि सीधे हाथ की तरफ खुलने वाले शंख को यदि पूर्ण विधि-विधान के साथ लाल कपड़े में लपेटकर अपने घर में अलग- अलग स्थान पर रखें तो हर तरह की परेशानियों का हल हो सकता है।

दक्षिणावर्ती शंख के लाभ –

  • दक्षिणावर्ती शंख पुण्य के ही योग से प्राप्त होता है। यह शंख जिस घर में रहता है, वहां लक्ष्मी की वृद्धि होती है। इसका प्रयोग अर्घ्य आदि देने के लिए विशेषत: होता है।
  • घर में यह शंख रखने से सम्मान की प्राप्ति, लक्ष्मी वृद्धि, यश और कीर्ति वृद्धि, संतान प्राप्ति, बाँझपन से मुक्ति, आयु की वृद्धि, शत्रु भय से मुक्ति, सर्प भय से मुक्ति, दरिद्रता से मुक्ति मिलती है ।
  • दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर उसे जिसके ऊपर छिड़क दिया जाये तो वह व्यक्ति तथा वस्तु पवित्र हो जाता है |
  • सीधे हाथ की तरफ खुलने वाले शंख को यदि पूर्ण विधि-विधान के साथ लाल कपड़े में लपेटकर अपने घर में अलग- अलग स्थान पर रखें तो हर तरह की परेशानियों का हल हो सकता है।
  • दक्षिणावर्ती शंख को तिजोरी मे रखा जाए तो घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है।
  • वास्तु-दोषों को दूर करता है, यह शंख जहां होता है वहां कई तरह के रोगों से मुक्ति मिलती है। इनके पूजन से श्री समृद्धि आती है।
  • दक्षिणावर्ती शंख जहां भी रहता है, वहां धन की कोई कमी नहीं रहती।
  • दक्षिणावर्ती शंख को अन्न भण्डार में रखने से अन्न, धन भण्डार में रखने से धन, वस्त्र भण्डार में रखने से वस्त्र की कभी कमी नहीं होती। शयन कक्ष में इसे रखने से शांति का अनुभव होता है।
  • इसमें शुद्ध जल भरकर, व्यक्ति, वस्तु, स्थान पर छिड़कने से दुर्भाग्य, अभिशाप, तंत्र-मंत्र आदि का प्रभाव समाप्त हो जाता है।
  • किसी भी प्रकार के टोने-टोटके इस शंख के आगे निष्फल हो जाते हैं।

पूजन और स्थापना की विधि –

तंत्र शास्त्र के अनुसार दक्षिणावर्ती शंख को विधि-विधान पूर्वक जल में रखने से कई प्रकार की बाधाएं शांत हो जाती है और भाग्य का दरवाजा खुल जाता है। साथ ही धन संबंधी समस्याएं भी समाप्त हो जाती हैं। दक्षिणावर्ती शंख को लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। इसका शुद्धिकरण इस प्रकार करना चाहिए- लाल कपड़े के ऊपर दक्षिणावर्ती शंख को रखकर इसमें गंगाजल भरें और कुश के आसन पर बैठकर इस मंत्र का जप करें :

“ऊँ श्री लक्ष्मी सहोदरया नम:”

इस मंत्र की कम से कम 1 माला जप करें और इसके बाद शंख को पूजा स्थान पर स्थापित कर दें |

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Tiger Eye Stone टाइगर आई/चित्ती पत्थर बाघ आंख के चमत्कारी लाभ

” टाइगर रत्न ” सबसे अधिक प्रभावी तथा बहुउपयोगी एवं शीघ्र फल प्रदान करने वाला स्टोन है। इस रत्न पर टाइगर के समान पिली एवं काली धारिया होने के कारण इसे ” टाइगर रत्न ” कहते है। यह प्रभाव में भी चीते के समान त्वरित फल प्रदान करता है। इसे धारण करने से तुरन्त फल की प्राप्ति हो जाती है। जो व्यकित आत्म विश्वाश की कमी के कारण बार बार व्यापार एवं अन्य कार्यो से असफल होता हो या दुखी जीवन व्यतीत कर रहा हो, उस व्यकित को टाइगर स्टोन गजब का का आत्म विश्वाश प्रदान करता है। इसे धारण करने से हर क्षेत्र में पूर्ण सफलता मिलती है तथा व्यकित साहसी एवं पुरुषार्थी बनता है। शेर जैसा आत्म बल और साहस भी यह रत्न प्रदान करता है। डरपोक और उदासीन व्यक्तियों का यह रत्न अदृश्य साथी माना गया है।

यह रत्न उन व्यक्तियों के लिए भी शुभ फल प्रदान करता है। जिनका भाग्य सोया हुआ हो। सोए भाग्य से आशय है कि व्यक्ति अपने प्रयासों का पूर्ण फल नही ले पा रहा हो। मेहनत का फल बराबर नही मिल रहा हो, पग-पग पर विभिन्न परेशानियों एवं संघर्षो का सामना कर पड़ रहा हो। जीवन में मृत्यु तुल्य दुःख भोग रहा हो, यश कीर्ति की कमी हो , दुश्मनों से परेशान हो, गरीबी, दरिद्रता जाने का नाम ना ले रही हो। ऐसी सिथति में टाइगर स्टोन वरदान साबित होता है । इसे प्राण प्रतिष्ठा सिद्ध करवा कर धारण करने से हर प्रकार के दुखों से निजात मिलती है। सोए हुए भाग्य को टाइगर स्टोन जगा देगा। यदि आप अन्य ग्रहों को भी इस टाइगर स्टोन से जगाना चाहते है तो निम्न प्रकार से टाइगर स्टोन को धारण करे। यह एक रत्न सभी ग्रहों को जगाने का बल रखता है।

टाइगर स्टोन पहनने के लाभ –

  • ✅जिसका व्यापार घाटे में जा रहा हो , सरकार संबंधित परेशानियां बढ़ती जा रही हो , व्यापार में लगातार घाटा बढ़ता जा रहा हो तो टाइगर स्टोन शुक्ल पक्ष के बुधवार को बुध की होरा में अनामिका उंगली में धारण करे।
  • कार्य स्थल पर व अन्य जगहों से मान – सम्मान , प्रतिष्ठा , प्रसिद्धि प्राप्त करने व यश ,कीर्ति की पताका फहराने के इच्छुक टाइगर स्टोन शुक्ल पक्ष की अष्टमी को तर्जनी उंगली या अनामिका उंगली में धारण करे।
  • जिस व्यकित का विवाह नही हो रहा हो सगाई तक भी ना हो पा रही हो उस जातक को शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि या गुरु पुष्य योग में धारण करने से शीघ्र विवाह के योग बनते है।
  • जिस लड़की का विवाह ना हो रहा हो सगाई टूट जाती हो , सगाई हो ही नही पा रही हो उस लड़की को टाइगर रत्न नाग पंचमी के दिन या गुरु पुष्य योग में इसे धारण करने से शीघ्र ही विवाह के योग बनते है।
  • जिन व्यकितयों के सन्तान होती है मर जाती है या बार – बार आबर्शन हो जाता है तब ऐसी सिथति में दोनो पति-पत्नी बराबर वजन का टाइगर रत्न प्राण प्रतिष्ठा करवा कर शुक्ल पक्ष में जब स्त्री मासिक धर्म में हो तब धारण करे तुरंत लाभ होगा।
  • जिस घर में लड़ाई – झगड़ा अधिक होता हो , सुख शांति न हो , छोटी – छोटी बातों पर क्लेश हो जाता हो तो उस परिवार का मुखिया टाइगर रत्न सोमवार के दिन चंद्र की होरा में आम के पत्ते के रस का अभिषेक करवा कर धारण करे । टाइगर रत्न सिद्ध व प्राण प्रतिष्टित होना चाहिये।
  • यदि आप कर्ज में डूबते जा रहे हैं तो कर्ज मुक्ति के लिए शुक्रवार के दिन अभिमंत्रित किया हुआ टाइगर आई रत्‍न को गले में लॉकेट के रूप में श्वेत धागे में धारण करें।
  • शत्रुओं से परेशान व्यकित मंगलवार के दिन मंगल की होरा में टाइगर स्टोन धारण करे।
  • घर में जिन बच्चों या व्यक्तियों को बार – बार नजर लग जाती हो उन्हें टाइगर स्टोन गले में धारण करना चाहिये। 
  • बार-बार वाहन दुर्घटना हो जाती हो तो प्राण प्रतिष्ठित टाइगर स्टोन मंगलवार के दिन धारण करे।
  • यदि आप निरन्तर कर्जे में डूबते जा रहे हो तो शुक्रवार के दिन सिद्ध किया हुआ टाइगर स्टोन गले में लॉकेट के रूप में सफेद धागे में धारण करे।
  • जिन व्यक्तियों को नोकरी में समस्या आ रही या कार्यस्थल में परेशानी हो रही हो तो रविवार को सूर्य की होरा में टाइगर स्टोन धारण करने से लाभ होगा।
  • काले जादू और बुरी नजर से बचने के लिए टाइगर आई स्‍टोन (Tiger Eye stone) सबसे कारगर उपाय है।

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Sulemani Hakik Stone (सुलेमानी हक़ीक एक बेहद चमत्कारी नगीना)

सुलेमानी हकीक को चमत्कारी रत्न इस लिए कहा गया हैं क्यों की की यह एक बेहद चमत्कारी नगीना है इस लिए इसे सुलेमानी रत्न का नाम दिया गया हे शास्त्रो में बहुत से रत्नों का उल्लेख मिलता है सुलेमानी हकीक भी उनमें शामिल है । यह रत्न एक ऐसा रत्न है जो तीन ग्रहों शनि , राहु और केतु के दोष दूर करता है इसके अतिरिक्त यदि आप पर कोई तंत्र मंत्र क्रिया जादू-टोना किया गया है तो यह उसके प्रभाव को भी खत्म करता है ।

जिस हकीक में सफेद पट्टियां पाई जाती हैं उसे सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। सुलेमानी रतन एक तोहफा है जिससे किसी भी राशि के जातक पहन कर अपनी ज़िन्दगी को खुशहाल बना सकते है माना जाता है सुलेमानी हकीक एक ऐसा चमत्कारी रत्न है जो आपको लोगो की बुरी नजर से बचा कर रखता है । हकीक एक अल्पमोती पत्थर है, जिसे उपरत्न की श्रेणी में मानाजाता है, यह अपारदर्शक होता है, जो कि अनेक रंगो में पाया जाता है, प्राचीनकाल से ही हकीक को ज्योतिष शास्त्र में महत्वपूर्ण माना गया है, आजकल प्राकृतिक रत्न इतने महंगे हैं, कि हर कोई उन्हें खरीद नहीं सकता ।

जो लोग महंगे रत्न खरीदने में असमर्थ हैं, वे अपने ग्रहों के अनुसार या किसी भी रंग के हकीक को धारण कर सकते हैं । हकीक या हकीक से बनी माला को ज्योतिष के लिहाज से बेहद ही लाभदायक माना गया है। ऐसी मान्यता है की हकीक की माला से जप करने से भगवान शिव अति प्रसन्न हो जाते है। इसके अलावा हकीक की माला फेरने के साथ यदि हनुमान जी के मन्त्र का जप किया जाए, तो यह भी अति लाभप्रद होता है। जीवन में कितना भी बड़े सा बड़ा कष्ट क्यों न आये हकीक के प्रभाव से स्वयं की रक्षा के साथ-साथ उन कष्टों का निवारण भी हो जाता है। हकीक को पहनने से तीन ग्रहों शनि, राहु केतु के दोष दूर हो जाते हैं, इसके अलावा हकीक को पहनने से बुरी नज़र से भी बचाव होता है, साथ ही आपके बिज़नेस में आ रही रुकावट भी दूर हो जाती है ।

सुलेमानी हकीक के लाभ :-

1. सुलेमानी हकीक एक ऐसा चमत्कारी रत्न है जो आपको लोगो की बुरी नजर से बचा कर रखता है । हकीक को पहनने से या उसे आस-पास रखने मात्र से ही आत्मविश्वास में बढ़ोत्तरी होती है। यह नकारात्मक ऊर्जा को बाहर करता है जिससे उदासी, उलझन और चिड़चिड़ा पन दूर होता है।

2. आपका व्यवसाय और नौकरी मे काला जादू या टोना – टोटका की वजह से अडचने आ रही हे तो सुलेमानी हकीक पत्थर उसका काट कर देता है और व्यवसाय में बढ़ोतरी होती है । हकीक पहनने से व्यक्ति अपने लक्ष्य के प्रति ज्यादा समर्पित होता है। ऐसा माना जाता है कि इसको पहनने से कार्यक्षेत्र में ज्यादा अच्छा परफार्मेंस हो जाता है, काम में मन लगता है और बेकार की बातें मन में नहीं आती हैं। हृदय और मस्तिष्क के बीच संतुलन बनाता है जिससे निर्णय क्षमता में भी वृद्धि होता है।

3. अगर आपको लगता हे आपके शत्रु ज़्यादा है या आपका शत्रु आपको परेशान करता है या आप पर जादू टोना करवाता है तो आपका उसके किए हुए जादू टोना से बचाव करता है और आपके शत्रु को परास्त करता है | आपका शत्रु आपके सामने शक्तिहीन हो जाता है ।

4. किसी भी कारण से अगर आपके घर मे बरकत नहीं हो रही हो तो भी आप सुलेमानी हकीक रत्न पहन सकते हे इससे आप के घर मे गरीबी दूर हो जायेगी और घर मे बरकत होने लगेगी । हकीक को प्रोटेक्टिव स्टोन यानि की सुरक्षा करने वाले रत्न की तरह भी इस्तेमाल किया जाता है। हकीक साथ रखने से बुरी नजर आप पर नहीं पड़ती और बुरी आत्माओं से भी आपका बचाव होता है। इसलिए ही माताएं अपने नवजात बच्चों के आस-पास इस पत्थर को रखती हैं।

5. सुलेमानी हकीक एक ऐसा रत्न हे जो काला जादू ख़त्म करता है और बुरी नज़र से बचाव करता है । माना जाता है कि हकीक को घर में या पास में रखने से सौभाग्य की वृद्धि होती है अर्थात भाग्योदय होता है। शनि देव की कृपा पाने के लिए काला हकीक या उसकी माला पहनना सबसे उत्तम माना गया है। जो लोग शनि से संबंधित वस्तुओं का व्यापार करते हैं, उन्हें काला हक़ीक पहनने से अवश्य ही लाभ होगा। इसके अलावा शनि देव के प्रकोप से बचने के लिए भी काले हक़ीक या उसकी माला का प्रयोग लाभकारी होता है। काले हक़ीक की माला से शनि के मंत्र का जप करना अत्यंत लाभकारी होता है।

6. जो लोग अक्सर बीमार रहते हे जिनकी सेहत हमेशा ख़राब रहती हे जिस कारण शारीरिक तोर पर कमजोरी हो जाती हैं तो उन लोगो को सुलेमानी हकीक जरुर धारण करना चाहिए उस से आपकी सेहत में काफ़ी अच्छा सुधार होगा ।

7. सुलेमानी हकीक को धारण करने के बाद लोग आपकी तरफ आकर्षित होने लगते है और आपको महत्त्व देने लगते है । गुणों से भरा हुआ यह पत्थर शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और प्राकृतिक रूप से व्यक्ति को बैलेंस करता है। ऐसा देखा गया है कि बैड रूम में इस पत्थर को रखने से नींद अच्छी आती है और रात को चौंक कर जागने की आदत भी कम हो जाती है।

8. जिन लोगो को भुत प्रेत का भय अक्सर परेसान करता हैं उन लोगो को सुलेमानी हकीक रत्न जरुर धारण करना चहिये । यह माला बहुत ही प्रभावशाली होती है, इसके इस्तेमाल करने से जातक के मन से डर का खात्मा हो जाता है, साहस में वृद्धि होती है। शत्रुओं से बचाव हो जाता है, इसके साथ ही एक सुरक्षा की भावना मन में उत्पन्न होती है।

9. ऐसा कहा गया हे जिस की कुण्डली मे राहु, केतु और शनि द्वारा बाधा आ रही हो उन लोगो को सुलेमान हकीक पहना चाहिए ताकि उनके दुष्रिणामों को दूर करे और व्यक्ति को सफलता मिलने लगे | हकीक के मोतियों की माला पहनने से मानसिक शांति मिलती है, मन में बुरे विचार नहीं आते, तन-मन रिलैक्स हो जाता है। किसी भी बुरे वक्त का जातक डटकर सामना करने में सक्षम हो जाता है। इसके प्रभाव से एकाग्रता में वृद्धि होती है, किसी भी काम के प्रति टेंशन नहीं रहती।

10. जिन लोगो को अनिद्रा की परेशानी हैं उनके लिए सुलेमानी हकीक बहुत फयदेमंद हैं । हकीक रिश्तों को अच्छा बनाए रखने के लिए भी बहुत उपयोगी माना गया है। यह शादी-शुदा जीवन में प्यार को बरकरार रखता है।

11. सुलेमानी हकीक बुरे विचारे को दूर करने और बुद्धि को तेज बनाने मे मदद करता हैं । घर से दरिद्रता दूर करने के लिए काले हकीक की माला को पूजा घर में स्थित माता लक्ष्मी के फोटो पर चढ़ाने से जातक के आर्थिक स्थिति में धीरे-धीरे सुधार होना शुरू हो जाता है।

सुलेमानी रत्न को धारण करने की विधि –

प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व या सुबह स्नान करने के बाद मंगलवार या शनिवार के दिन यह हकीक या माला धारण करना शुभ फलदायक होता है। काला हकीक व उसकी की माला धारण करते समय शनि, तथा मंगल देव को याद करते हुए पूरी श्रद्धा से पूजा अर्चना करके 108 बार शनि के बीज मन्त्र – ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः मंगल के बीज मंत्र- ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम: का जाप जरुर करना चाहिए।

1 आपको सुलेमानी हकीक शनिवार को धारण करना है ।
2 इसको कच्ची लस्सी या फिर गोमूत्र से धो कर पहनना हैं ।
3 इसको मध्यमा उंगली में धारण करना है ।
4 इसको आप चाँदी की अंगूठी में धारण करना है व सीधे हाथ में धारण करना है ।
5 अगर आप उंगली में धारण नही करना चाहते है तो चाँदी के लॉकेट में भी गले में धारण कर सकते है ।
6 शनिवार के दिन सुलेमानी हकीक को कोई भी व्यक्ति धारण कर सकता है इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं हैं ।

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